बवासीर (पाइल्स) का इलाज दिल्ली में: लक्षण, लेज़र ट्रीटमेंट और रिकवरी की पूरी जानकारी
Updated: 2 days ago
चिकित्सकीय समीक्षा: डॉ. सौरभ बंसल — MBBS, DNB (Surgery), FNB (MAS), FALS (Advanced Laparoscopic Surgery), रोबोटिक सर्जरी में प्रशिक्षित (Intuitive), Colorectal Fellowship (Taiwan)। दिल्ली मेडिकल काउंसिल पंजीकरण सं. 37887। जीआई, लेप्रोस्कोपिक और मिनिमल एक्सेस सर्जन। मुख्य विशेषज्ञता: जर्ड (GERD), हाइटस हर्निया, कोलोरेक्टल और हर्निया सर्जरी। समीक्षा की तारीख: 17 अक्टूबर 2026
टॉयलेट में खून दिखा या बैठने में दर्द और जलन होने लगी, और ज़्यादातर लोग शर्म के मारे महीनों तक किसी से बात ही नहीं करते। सच यह है कि बवासीर यानी पाइल्स (piles) बहुत आम बीमारी है और इसका इलाज मुमकिन है। शुरुआत अक्सर खान-पान और आदतें बदलने से होती है, और ज़रूरत हो तो लेज़र (laser) पाइल्स ट्रीटमेंट जैसी कम चीर-फाड़ वाली तकनीक मौजूद है।
बवासीर असल में है क्या?
मलद्वार (anus) के पास खून की नसों के छोटे गद्दे हर इंसान में होते हैं। जब इन पर बार-बार ज़ोर पड़ता है, तो ये सूजकर फूल जाते हैं और नीचे खिसकने लगते हैं। इसी को बवासीर या हेमरॉइड्स (haemorrhoids) कहते हैं।
अंदरूनी और बाहरी बवासीर
अंदरूनी बवासीर: अक्सर दर्द कम, पर चमकीला लाल खून आ सकता है। बढ़ने पर मस्सा बाहर आने लगता है।
बाहरी बवासीर: मलद्वार के बाहर त्वचा के नीचे होती है। सूजन, खुजली और खून का थक्का जमने पर अचानक तेज़ दर्द हो सकता है।
ग्रेड से समझें कि बवासीर कितनी बढ़ी है
ग्रेड 1: सूजन सिर्फ़ अंदर, कभी-कभी खून।
ग्रेड 2: मस्सा बाहर आता है और अपने-आप अंदर चला जाता है।
ग्रेड 3: मस्सा उंगली से अंदर करना पड़ता है।
ग्रेड 4: मस्सा हमेशा बाहर रहता है।
सही इलाज काफ़ी हद तक ग्रेड और लक्षणों पर निर्भर करता है।
बवासीर क्यों होती है?
लंबी कब्ज़ और टॉयलेट में ज़ोर लगाना
घंटों बैठे रहना, जैसे डेस्क जॉब, लंबी ड्राइव या टॉयलेट में मोबाइल लेकर बैठना
खाने में फ़ाइबर और पानी कम, मैदा और फ़ास्ट फ़ूड ज़्यादा
ज़्यादा वज़न, प्रेग्नेंसी और बार-बार दस्त
लक्षण: किन बातों पर ध्यान दें
मल के साथ या टॉयलेट पेपर पर चमकीला लाल खून
मलद्वार के पास मस्सा, गाँठ या सूजन
खुजली, जलन या चिपचिपा डिस्चार्ज (mucus)
बैठने में तकलीफ़ या पेट पूरी तरह साफ़ न होने का एहसास
ध्यान दें: हर तकलीफ़ बवासीर नहीं होती। टॉयलेट के समय कटने जैसा दर्द अक्सर फ़िशर (fissure) में होता है, और बार-बार पस बनना फ़िस्टुला (fistula) की तरफ़ इशारा कर सकता है। इनका इलाज अलग है।
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
खून बार-बार आ रहा है, चाहे थोड़ा ही हो
मस्सा बाहर आता है या घरेलू उपायों के बाद भी तकलीफ़ बनी है
40 की उम्र के बाद पहली बार खून आया है, या परिवार में आंत के कैंसर का इतिहास है
टॉयलेट की आदत बदली है, वज़न घट रहा है, खून की कमी (anaemia) है या मल काला है
तुरंत इमरजेंसी में जाएँ अगर: बहुत ज़्यादा खून आ रहा हो, चक्कर या बेहोशी लगे, या बहुत तेज़ दर्द के साथ बुखार हो।
जांच कुछ ही मिनट की होती है। ज़रूरत हो तो कोलोनोस्कोपी (colonoscopy) की सलाह दी जाती है, ताकि खून की कोई और वजह छूट न जाए।
बवासीर के इलाज के विकल्प
1. खान-पान और आदतें बदलना
हर ग्रेड में यही इलाज की नींव है। खाने में फ़ाइबर बढ़ाएँ, भरपूर पानी पिएँ, और डॉक्टर की सलाह से इसबगोल लें। गुनगुने पानी में 10-15 मिनट बैठना, यानी सिट्ज़ बाथ (sitz bath), सूजन और जलन में आराम देता है।
2. दवाइयाँ और छोटी प्रक्रियाएँ
मल नरम करने की दवा और क्रीम राहत देती हैं, पर बड़े मस्से अक्सर इनसे ख़त्म नहीं होते। शुरुआती ग्रेड में कुछ मरीज़ों के लिए रबर बैंड लाइगेशन (rubber band ligation) जैसी छोटी प्रक्रिया पर भी विचार हो सकता है।
3. लेज़र पाइल्स ट्रीटमेंट
इसमें एक पतला लेज़र प्रोब मस्से तक पहुँचाया जाता है। लेज़र की नियंत्रित ऊर्जा उन नसों को बंद करती है जो मस्से को खून पहुँचाती हैं, जिससे मस्सा धीरे-धीरे सिकुड़ता है और खून आना व सूजन कम होती है। बड़े चीरे और टांके नहीं लगते, और आसपास के स्वस्थ हिस्से को बचाने पर ध्यान दिया जाता है।
4. पारंपरिक या स्टेपलर सर्जरी
हर मरीज़ के लिए लेज़र सही नहीं होता। बड़ी या कुछ ख़ास तरह की बवासीर में पारंपरिक ऑपरेशन (haemorrhoidectomy) या स्टेपलर सर्जरी बेहतर रह सकती है। डॉ. सौरभ बंसल जांच के बाद बताते हैं कि आपके लिए कौन-सा तरीका ठीक है, और क्यों।
लेज़र पाइल्स सर्जरी वाले दिन क्या होता है?
पहले: ब्लड टेस्ट और एनेस्थीसिया (anaesthesia) की जांच। खून पतला करने, शुगर या BP की दवा लेते हैं तो डॉक्टर को बताएँ, पर खुद से कोई दवा बंद न करें।
प्रक्रिया: लोकल या जनरल एनेस्थीसिया में होती है और आमतौर पर लगभग 20 से 40 मिनट लगते हैं।
बाद में: यह डे-केयर प्रक्रिया है, ज़्यादातर मरीज़ कुछ देर निगरानी के बाद उसी दिन घर चले जाते हैं।
रिकवरी और खान-पान
रिकवरी कैसी रहती है?
पहले कुछ दिन हल्का दर्द, भारीपन या थोड़ा खून आना आम है। कई लोग 2-3 दिन में रोज़ के हल्के काम शुरू कर देते हैं, पर हर किसी की रिकवरी अलग होती है। सिट्ज़ बाथ लें, दवा डॉक्टर के बताए अनुसार लें और कुछ समय भारी वज़न उठाने से बचें।
क्या खाएँ, क्या कम करें
खाएँ: दाल, हरी सब्ज़ियाँ, सलाद, पपीता, अमरूद जैसे फल, दलिया, चोकर वाले आटे की रोटी और दही
पानी: दिन भर भरपूर पानी, ताकि मल नरम रहे
कम करें: मैदा, ज़्यादा तला-भुना और तेज़ मिर्च-मसाला, ख़ासकर शुरुआती दिनों में
बचें: शराब, सिगरेट और टॉयलेट की हाजत रोकने से
डॉक्टर को तुरंत फ़ोन करें अगर: तेज़ बुखार, ज़्यादा खून, पेशाब रुकना या बढ़ता दर्द हो।
बवासीर से जुड़े आम मिथक और सच
मिथक: "बवासीर सिर्फ़ गर्म चीज़ें या आम खाने से होती है।" सच: तीखा खाना जलन बढ़ा सकता है, पर असली वजह अक्सर कब्ज़, ज़ोर लगाना और लंबे समय तक बैठना होती है।
मिथक: "टॉयलेट में खून आए तो वो बवासीर ही होगी।" सच: खून फ़िशर, पॉलिप, आंतों की सूजन या कभी-कभी कैंसर से भी आ सकता है, इसलिए जांच ज़रूरी है।
मिथक: "ऑपरेशन के बाद मल पर कंट्रोल चला जाता है।" सच: मलद्वार की हर सर्जरी में कुछ जोखिम होते हैं, पर सही प्रक्रिया चुनकर सावधानी से की गई सर्जरी में कंट्रोल पर लंबे समय का असर आम नहीं है। अपने जोखिम के बारे में डॉक्टर से खुलकर पूछें।
मिथक: "लेज़र के बाद बवासीर कभी दोबारा नहीं होगी।" सच: लेज़र से लंबी राहत मिल सकती है, पर कब्ज़ और आदतें नहीं बदलीं तो बवासीर लौट सकती है। कोई भी इलाज 100% गारंटी नहीं देता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या लेज़र पाइल्स सर्जरी में बहुत दर्द होता है?
प्रक्रिया एनेस्थीसिया में होती है, इसलिए उस समय दर्द नहीं होता। पुराने तरीके के ऑपरेशन की तुलना में बाद में आमतौर पर दर्द कम होता है, पर कुछ दिन हल्की तकलीफ़ हो सकती है।
लेज़र प्रक्रिया में कितना समय लगता है, क्या उसी दिन घर जा सकते हैं?
आमतौर पर लगभग 20 से 40 मिनट। यह डे-केयर प्रक्रिया है, ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन घर चले जाते हैं।
ऑपरेशन के बाद काम पर कब लौट सकते हैं?
कई लोग 2-3 दिन में हल्के काम शुरू कर देते हैं। भारी काम और लंबे सफ़र के लिए डॉक्टर आपकी रिकवरी देखकर सलाह देंगे।
क्या हर तरह की बवासीर में लेज़र हो सकता है?
नहीं। लेज़र कई ग्रेड की बवासीर में कारगर है, पर कुछ मामलों में दूसरा ऑपरेशन बेहतर रहता है। यह जांच के बाद ही तय होता है।
क्या लेज़र के बाद बवासीर दोबारा हो सकती है?
हाँ, ख़ासकर अगर कब्ज़ और ज़ोर लगाने की आदत बनी रहे। फ़ाइबर, भरपूर पानी और टॉयलेट की अच्छी आदतें ख़तरा कम करती हैं।
क्या बवासीर बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है?
शुरुआती बवासीर अक्सर खान-पान, आदतों और दवाइयों से संभल जाती है। बार-बार खून आए या मस्सा बाहर आए, तो प्रक्रिया या ऑपरेशन पर बात करनी चाहिए।
हौज़ ख़ास या ग्रीन पार्क में डॉ. सौरभ बंसल से मिलें
बवासीर में शर्माने से तकलीफ़ अक्सर बढ़ती ही है। खून आ रहा है या मस्सा बाहर आता है, तो डॉ. सौरभ बंसल से कंसल्टेशन (consultation) लें। वे जांच करके बताएँगे कि आपको सिर्फ़ दवा और परहेज़ चाहिए या लेज़र पाइल्स ट्रीटमेंट जैसा कोई इलाज।
THE CLINICS MISC, हौज़ ख़ास (मुख्य क्लिनिक): H2, हौज़ ख़ास, नीली मस्जिद के सामने, नई दिल्ली 110016। सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से शाम 6 बजे
THE CLINICS, ग्रीन पार्क: G32, ग्राउंड फ़्लोर, ग्रीन पार्क एक्सटेंशन, नई दिल्ली 110016। सोमवार से शनिवार, शाम 6 से 8 बजे
फ़ोन: +91 8368375734 | +91 9217381353
ईमेल: drsaurabhatindia@gmail.com
इन क्लिनिकों में दूसरे डॉक्टर भी बैठते हैं, इसलिए आने से पहले फ़ोन करके डॉ. बंसल का समय ज़रूर पक्का कर लें।
ये भी पढ़ें: लगातार ज़ोर लगाने से हर्निया का ख़तरा भी बढ़ता है: हर्निया सर्जरी की पूरी गाइड।
ज़रूरी सूचना (डिस्क्लेमर): यह लेख सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की निजी सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। हर मरीज़ की हालत, रिकवरी और जोखिम अलग होते हैं, इसलिए अपनी तकलीफ़ के लिए किसी योग्य डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और डॉ. सौरभ बंसल (DMC पंजीकरण सं. 37887) ने इसकी चिकित्सकीय समीक्षा की है।



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